उत्तर प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग में आपका स्वागत है

भारत एक कल्याणकारी राज्य है, जो अपने नागरिकों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करके उनको सामाजिक न्याय दिलाने के लिये कृत संकल्पित है। इस सिद्धान्त को स्थापित करने हेतु राज्य का यह दायित्व है कि वह समाज के कमजोर वर्गों के विकास के लिये इस प्रकार के कदम उठाये कि सामान्यत: सम्पूर्ण समाज के प्रत्येक वर्ग का विशेषत: अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गों एवं महिलाओं का विकास सम्भव हो सकें। पिछड़े वर्गों के कल्याण हेतु कार्यक्रमों एवं योजनाओं का नियोजन एवं संचालन प्रथम पंचवर्षीय योजना से लेकर 12 अगस्त, 1995 तक समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जाता रहा। समाज कल्याण विभाग की स्थापना वर्ष 1948-49 में हुयी थी और उस समय इस विभाग का नाम "हरिजन सहायक विभाग" था। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों को इसके पूर्व शिक्षा विभाग से कुछ शैक्षिक सुविधायें दी जाती थी, इसके अतिरिक्त वर्ष 1940-41 में "रिक्लेमेंशन विभाग" के नाम से एक अलग विभाग संचालित था।

भारत एक कल्याणकारी राज्य है, जो अपने नागरिकों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करके उनको सामाजिक न्याय दिलाने के लिये कृत संकल्पित है। इस सिद्धान्त को स्थापित करने हेतु राज्य का यह दायित्व है कि वह समाज के कमजोर वर्गों के विकास के लिये इस प्रकार के कदम उठाये कि सामान्यत: सम्पूर्ण समाज के प्रत्येक वर्ग का विशेषत: अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गों एवं महिलाओं का विकास सम्भव हो सकें। पिछड़े वर्गों के कल्याण हेतु कार्यक्रमों एवं योजनाओं का नियोजन एवं संचालन प्रथम पंचवर्षीय योजना से लेकर 12 अगस्त, 1995 तक समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जाता रहा। समाज कल्याण विभाग की स्थापना वर्ष 1948-49 में हुयी थी और उस समय इस विभाग का नाम "हरिजन सहायक विभाग" था। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों को इसके पूर्व शिक्षा विभाग से कुछ शैक्षिक सुविधायें दी जाती थी, इसके अतिरिक्त वर्ष 1940-41 में "रिक्लेमेंशन विभाग" के नाम से एक अलग विभाग संचालित था। इस विभाग का मुख्य कार्य उन जातियों का कल्याण था, जो उस समय अपराध की ओर उन्मुख थी और यह विभाग तत्कालीन समय में रिक्लेमेंशन अधिकारी के अधीन था। कुछ समय तक समाज कल्याण विभाग एवं रिक्लेमेंशन विभाग दोनों ही साथ / साथ कार्य करते रहे एवं तत्पश्चात रिक्लेमेंशन विभाग के समस्त कार्य को "हरिजन सहायक विभाग" में सम्मिलित कर दिया गया। वर्ष 1955 में समाज कल्याण विभाग की स्थापना की गयी, जिसे वर्ष 1961 में अलग मानते हुए निदेशक, हरिजन एवं समाज कल्याण विभाग के अधीन कर दिया गया। सामन्जस्य तथा समन्वय की दृष्टि से अलग / अलग चल रहे हरिजन सहायक विभाग एवं समाज कल्याण विभाग को वर्ष 1977-78 में सभी स्तरों पर विलीनकरण कर "हरिजन एवं समाज कल्याण विभाग" कर दिया गया। वर्ष 1991-92 में विभाग का नाम "समाज कल्याण विभाग" कर दिया गया।

पिछड़े वर्गों की प्रदेश की आबादी तथा उनकी शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक दशा की गम्भीर स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए उनके कल्याण हेतु स्वतंत्र रूप से पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की स्थापना की आवश्यकता सरकार द्वारा अनुभव की गयी। पिछड़े वर्गों के कल्याण हेतु तथा कार्यक्रमों एवं योजनाओं का नियोजन एवं पूर्ण रूपेण संचालन हेतु दिनांक 12 अगस्त, 1995 मा0 मुख्यमंत्री द्वारा पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को मूर्त रूप दिया गया तथा ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, विकलांग कल्याण विभाग, सैनिक कल्याण विभाग एवं सैनिक कल्याण निर्माण निगम की भी स्थापना की गयी। इसके अतिरिक्त इन सभी विभागों से सम्बन्धित निदेशालय का अलग से गठन कर उनसे सम्बन्धित समस्त योजनाओं को समाज कल्याण विभाग से स्थानान्तरित करके सम्बन्धित विभागों को संचालन हेतु दे दिया गया।

और पढ़ें..

महत्वपूर्ण लिंक